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Must know facts about UDAN

UDAN- Ude Desh Ka Aam Naagrik - is an innovative scheme to develop the regional aviation market. It is a market-based mechanism in which airlines bid for seat subsidies. 

This first-of-its-kind scheme globally will create affordable yet economically viable and profitable flights on regional routes so that flying becomes affordable to the common man even in small towns. 

This first-of-its-kind scheme globally will create affordable yet economically viable and profitable flights on regional routes so that flying becomes affordable to the common man even in small towns. 

How would it work:
The scheme UDAN envisages providing connectivity to un-served and under-served airports of the country through revival of existing air-strips and airports. The scheme would be in operation for a period of 10 years. 

Size of airplanes:
The selected airline operator would have to provide a minimum of 9 and a maximum of 40 UDAN Seats ( subsidized rates )on the UDAN Flights for operations through fixed wing aircraft and a minimum of 5 and a maximum of 13 Seats on the Flights for operations through helicopters. On each such route, the minimum frequency would be three and maximum of seven departures per week. Route networks would also be encouraged under the scheme to achieve economies of scale and optimal usage of aircraft. 

Fare:
The fare for a one hour journey of appx. 500 km on a fixed wing aircraft or for a 30 minute journey on a helicopter would now be capped at Rs. 2,500, with proportionate pricing for routes of different stage lengths / flight duration. 

In partnership:
Central Government would provide concessions in the form of reduced excise duty, service tax, permission to trade ASKMs for Non-RCS (UDAN) Seats and flexibility of code sharing at the RCS (UDAN) airports. 

State governments will have to lower the VAT on ATF to 1% or less, besides providing security and fire services free of cost and electricity, water and other utilities at substantially concessional rates. 

उड़ान योजना

क्षेत्रीय वायु संपर्क योजना उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) के तहत 190 मार्गों के लिए बोलियां मिली हैं। इस योजना के तहत एक घंटे की उड़ान के लिए अधिकतम किराया 2,500 रुपए होगा। सरकार की उड़ान योजना का मकसद वंचित या कम उड़ान सुविधाओं वाले हवाई अड्डों से या को हवाई संपर्क उपलब्ध कराना और विमान यात्रा को सस्ता करना है।

500 करोड़ की हो सकती है जरुरत

उन्होंने कहा कि पहले साल में वायेबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के रूप में 500 करोड़ रुपए की जरूरत हो सकती है। हालांकि, मार्गों के आवंटन के बाद ही इसके बारे में सही-सही बताया जा सकेगा। वीजीएफ के लिए एक कोष बनाया गया है जिसमें पहले से सेवारत मुख्य मार्गों पर प्रति उड़ान अधिभार लगाकर राशि जुटाई जाएगी। इस प्रस्ताव पर कुछ विमान सेवा कंपनियों के अदालत में जाने के बारे में उन्होंने कहा कि अधिभार की राशि सभी विमान सेवा कंपनियों को विश्वास में लेकर ही तय की गई थी। इसके बावजूद सरकार सभी विमान सेवा कंपनियों से विचार-विमर्श कर उन्हें समझाने की कोशिश करेगी कि यह पूरे विमानन क्षेत्र के हित में है।

इतने किलोमीटर की यात्रा पर लागू होगी योजना                                                 
उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुरूप वीजीएफ के तहत दी जाने वाली राशि की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी। साथ ही अधिभार की वार्षिक समीक्षा की जा सकती है। ‘उड़ान’ योजना 151 से 800 किलोमीटर तक की यात्रा पर लागू होगी। इसमें प्रत्येक सीट पर न्यूनतम वीजीएफ 2,350 रुपए तथा अधिकतम 5,100 रुपए देने का प्रस्ताव है जो दूरी के हिसाब से तय होगी। इसके अलावा दो ऐसे स्थानों के बीच सेवा शुरू करने के लिए जहां पहले से कोई उड़ान नहीं है न्यूनतम तथा अधिकतम राशि क्रमश: 2,590 रुपए और 5,080 रुपए होगी। साथ ही 1 सीटों तक के विमानों के संचालन पर वीजीएफ ज्यादा मिलेगा। हेलिकॉप्टर सेवा के लिए न्यूनतम 700 रुपए (11 से 15 मिनट की उड़ान के लिए) तथा अधिकतम 5,900 रुपए (एक घंटे या ज्यादा की उड़ान के लिए) प्रति सीट वीजीएफ रखा गया है। 

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